ग़ज़ल
ग़ज़ल से दिल लगाए जा रहा हूँ सुख़न का सुख़ उठाए जा रहा हूँ ग़ज़ल के ग़म मिटाए जा रहा हूँ यही नेकी कमाए जा रहा हूँ सबक़ लेकर सुख़न का दोस्तो से क़दम आगे बढ़ाए जा रहा हूँ रदीफ़ो क़ाफ़िये के साथ मिलकर ग़ज़ल के गुल खिलाए जा रहा हूँ सफ़र करके ख़्यालों के जहां में नये अफ़कार लाए जा रहा हूँ लगाकर हर्फ़ के हीरे जवाहर ग़ज़ल का घर सजाए जा रहा हूँ रहूँगा 'ताज' अब इसमें हमेशा ग़ज़ल का घर बसाए जा रहा हूँ * मुनव्वर अली 'ताज' उज्जैन, मध्य प्रदेश 7000447654